मुझे नहीं पता कि तब के जमाने में बच्चे गब्बर का नाम सुनकर कैसा रिएक्ट करते थे, पर इन आतंकवादियों के नाम सुनकर आज के जमाने में बच्चे हँसते जरूर हैं। ;)
जरा गौर कीजिये, "टुँडा"… या "भटकल"। यार कैसा नाम हुआ ये भला। एक तो मानो लगता है कि कोई सब्जी का नाम हो - भिंडा। जब पहली बार इसका नाम सुना तो दस मिनट तक खीखीयाना रोक ही ना सका। नाम ही ऐसा है। और "भटकल"… ये तो किसी भी एंगल से आतंकवादी का नाम लगता ही नहीं है। "उदास", "अकेला", "अलबेला", "अनजाना", "बैरागी", "भटकल"; प्रायः शायरों के नाम में ऐसे टाइटल हुआ करते हैं। ऐसे टाइटलों के लगे होने से कोई "टुच्चे" शायर भी हों तो वो "बड़े साहित्यकार" प्रतीत होते हैं। परंतु कोई "टुच्चा" जो अपने आप को आतंकवादी कहता हो तथा अपने नाम ऐसे हास्यास्पद रखता हो तो मुझे नहीं लगता कि उससे कोई डरेगा भी। "आँख का अँधा, नाम नयनसुख" वाली कहावत ऐसे ही लोगों के लिये लिखी गयी है शायद। जो आतंक पैदा करे वो हुआ आतंकवादी, परन्तु जो हास्य पैदा कर दे वो काहे का आतंकवादी! "हास्यवादी" कहो भाई।
इतिहास में पढ़ा था। पुराने जमाने में भी दहशतगर्द हुआ करते थे, मसलन "चँगेज़ ख़ाँ"। नाम सुनकर ही कितनों की धोती गीली हो जाती होगी। वहीं, एक था "मुहम्मद गोरी"… मुझे नहीं लगता कि इसके नाम से कोई ख़ौफ़ खाता होगा। मेरी तो हँसी छूट जाती है। ये भी कोई नाम हुआ… "गोरी"। इससे ज्यादा डरावने तो आज-कल की गोरियों के होते हैं, जिनके नाम सुनते ही बेचारे पतिदेव के पसीने छूटने लगते हैं। ;)
अब भैय्या, कहलाते हैं आतंकवादी तो नाम से भी तो लगना चाहिये ना कि अमुक आदमी "आतंकवादी" है। माना कि अब "चँगेज़ ख़ाँ" और "तुर्रम ख़ाँ" टाइप नाम फ़ैशन में नहीं रहे, आउटडेटेड हो चुके हैं। या ये भी मान सकता हूँ कि ये आतंकवादियों की कोई नयी रणनीति हो ताक़ि इन्टरपोल की आँखों में धूल झोंका जा सके। शायद वो सोचते होंगे कि इस्लाम तो वैसे ही बदनाम है विदेशी एयरपोर्टों पर, ऐसे में अगर नाम भी "ख़तरनाक़" टाइप रख लिये तो भविष्य में ना तो कोई "टावर" उखाड़ पायेंगे ना ही "कुछ" और उखाड़ पायेंगे। परन्तु ऐसी भी क्या नामों की किल्लत हो गयी है आतंकवादी समाज में!
मेरी तो उन हास्यवादियों को यही राय है कि भैय्या भूतकाल के "मुहम्मद गोरी" अथवा "गोलमाल" के "बबली भाई" से प्रेरित होकर अपने नाम मत रखा करो। नाम ऐसे रखो कि सुन कर ही दहशत पैदा हो जाये दिल में। धोती ना सही, पर पैन्ट तो जरूर गीली-पीली हो जाये लोगों की। मेरा कर्तव्य था, सो आपको सलाह दे दिया। आगे आपकी मर्ज़ी।
जरा गौर कीजिये, "टुँडा"… या "भटकल"। यार कैसा नाम हुआ ये भला। एक तो मानो लगता है कि कोई सब्जी का नाम हो - भिंडा। जब पहली बार इसका नाम सुना तो दस मिनट तक खीखीयाना रोक ही ना सका। नाम ही ऐसा है। और "भटकल"… ये तो किसी भी एंगल से आतंकवादी का नाम लगता ही नहीं है। "उदास", "अकेला", "अलबेला", "अनजाना", "बैरागी", "भटकल"; प्रायः शायरों के नाम में ऐसे टाइटल हुआ करते हैं। ऐसे टाइटलों के लगे होने से कोई "टुच्चे" शायर भी हों तो वो "बड़े साहित्यकार" प्रतीत होते हैं। परंतु कोई "टुच्चा" जो अपने आप को आतंकवादी कहता हो तथा अपने नाम ऐसे हास्यास्पद रखता हो तो मुझे नहीं लगता कि उससे कोई डरेगा भी। "आँख का अँधा, नाम नयनसुख" वाली कहावत ऐसे ही लोगों के लिये लिखी गयी है शायद। जो आतंक पैदा करे वो हुआ आतंकवादी, परन्तु जो हास्य पैदा कर दे वो काहे का आतंकवादी! "हास्यवादी" कहो भाई।
इतिहास में पढ़ा था। पुराने जमाने में भी दहशतगर्द हुआ करते थे, मसलन "चँगेज़ ख़ाँ"। नाम सुनकर ही कितनों की धोती गीली हो जाती होगी। वहीं, एक था "मुहम्मद गोरी"… मुझे नहीं लगता कि इसके नाम से कोई ख़ौफ़ खाता होगा। मेरी तो हँसी छूट जाती है। ये भी कोई नाम हुआ… "गोरी"। इससे ज्यादा डरावने तो आज-कल की गोरियों के होते हैं, जिनके नाम सुनते ही बेचारे पतिदेव के पसीने छूटने लगते हैं। ;)
अब भैय्या, कहलाते हैं आतंकवादी तो नाम से भी तो लगना चाहिये ना कि अमुक आदमी "आतंकवादी" है। माना कि अब "चँगेज़ ख़ाँ" और "तुर्रम ख़ाँ" टाइप नाम फ़ैशन में नहीं रहे, आउटडेटेड हो चुके हैं। या ये भी मान सकता हूँ कि ये आतंकवादियों की कोई नयी रणनीति हो ताक़ि इन्टरपोल की आँखों में धूल झोंका जा सके। शायद वो सोचते होंगे कि इस्लाम तो वैसे ही बदनाम है विदेशी एयरपोर्टों पर, ऐसे में अगर नाम भी "ख़तरनाक़" टाइप रख लिये तो भविष्य में ना तो कोई "टावर" उखाड़ पायेंगे ना ही "कुछ" और उखाड़ पायेंगे। परन्तु ऐसी भी क्या नामों की किल्लत हो गयी है आतंकवादी समाज में!
मेरी तो उन हास्यवादियों को यही राय है कि भैय्या भूतकाल के "मुहम्मद गोरी" अथवा "गोलमाल" के "बबली भाई" से प्रेरित होकर अपने नाम मत रखा करो। नाम ऐसे रखो कि सुन कर ही दहशत पैदा हो जाये दिल में। धोती ना सही, पर पैन्ट तो जरूर गीली-पीली हो जाये लोगों की। मेरा कर्तव्य था, सो आपको सलाह दे दिया। आगे आपकी मर्ज़ी।
चलता हूँ, राम-राम!!!
- सुमित सुमन
